मोबाइल की रिंग बजते ही आपको एक तरह की ख़ुशी का अनुभव होता है कि कोई अपना आपको याद कर रहा है लेकिन ये घंटी आपके लिया कहीं खतरे की घंटी न बन जाए। आज मोबाइल फोन रखना केवल शौक ही नहीं बल्कि रोज़मर्रा की ज़रूरत बनता जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बातचीत के दौरान इसमें से निकलने वाले रेडियेशन किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं। जी हाँ वैज्ञानिक तौर पर यह साबित हो चुका है कि आधा से एक घंटा लगातार बात करने से मोबाइल फोन से एक तरह का रेडियेशन, जिसे हम तरंग कहते हैं निकलती है जो हमें खतरनाक और जानलेवा बिमारियों की ओर अग्रसित करती हैं। इतना ही नहीं मोबाइल फोन पर तो बात करने करने के दौरान ही रेडियेशन निकलते हैं परन्तु हमारे घर के आस पास - पास लगे विभिन्न कम्पनियों के टावर से लगातार 24 घंटे ऐसे रेडियेशन निकलते रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये तरंग इस हद तक घातक होतीं हैं कि डिप्रेशन , थकान , चिडचिडापन और यहाँ तक कि कैंसर , ब्रेन ट्यूमर जैसी बड़ी बिमारियों का रूप धारण कर सकतीं हैं . इस तरह के कई केस सामने आए हैं। मोबाइल की लो बैटरी पर यदि बात की जाए तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है।
मोबाइल फोन कम्पनियों के टावर से निकलने वाले रेडियेशन का एक मानक तैयार किया गया है जो सरकार द्वारा आने वाले दिनों में लागू किया जायेगा। तय किये गए मानक से अधिक रेडियेशन निकलने पर सम्बंधित मोबाइल कंपनियों को जुर्माना देना पड़ेगा।
मोबाइल का हर समय बजना या हर समय उस पर बात करना उतना ही बुरा है जैसा ड्राइंग-रूम में बैठे चभड़ चभड़ करना। कुछ लोग बात करने का बहाना ढूँढ़ते हैं। ज़रूरत से ज़्यादा 3-3, 4-4 फोन रखते हैं। दोस्तों, रिश्तेदारों व निजी लोगों से फुरसत मिल गयी तो कुछ नहीं तो टेली-कॉलर की ही बकवास सुनने बैठ गए। लुभावनी स्कीमें सुनते ही यह स्वाभाविक है कि यदि बात में थोड़ा दम है तो उत्सुकता पैदा हो जाती है और आप बेरुखी से फोन नहीं काटते। एक और मुसीबत तब होती है जब टेली-कॉलर उस बैंक का नाम लेता है जिसमे आप का खाता हो। आप को लगता है कहीं यह असली कॉल न हो, आप के अपने बैंक से। फिर आप उसकी नई-नई स्कीमों में फंसते हुए घंटो लगे रहते हैं।
कहते हैं न जान है तो जहान है। तो फिर इसकी शुरुवात हमें आज से नहीं बल्कि अभी से करनी चाहिए। मोबाइल पर उतनी ही बात करें जितनी ज़रूरी हो और अपने आस-पड़ोस में लगे विभिन्न मोबाइल कंपनियों के टावर से निकलने वाले रेडियेशन की भी जानकारी रखें और तय किये गए मानक से अधिक रेडियेशन निकलने पर तुरंत सम्बंधित अधिकारी को सूचना दें।
