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Thursday, 26 April 2012

मुस्कुराइए कि आप भारतवासी हैं

आइये भीड़ में खो जाइये ,मुफ्त में धक्के खाइए . गाड़ियों का ज़हरीला धूँवा पी जाइये ,और आंसू बहाइये . गड्डों से खुद को बचाइए .अगर गिर पड़े तो टांग सहलाइए और टांग पर प्लास्टर बंधवाइए . घर जा कर जहाँ चाहिए वहां कूड़ा गिराइए और गन्दगी फैलाइए . क्यों नहीं ! यह देश आप का ही तो है . हर समय मौके की तलाश में रहिये . मौका पाते ही मेनहोल के ढक्कन चुराइए और बाद में उसमे ही छपाक से गिर जाइये . हिन्दुस्तानी तहज़ीब भुला कर एक - दुसरे पर बक- बकाइये  . खुद मानवता भूल कर सबको मानवता का पाठ पढ़ाइये .
क्या यह ठीक है ?
आप ही बताइए ? 
तो आइये भाईचारे , प्यार , और सभ्यता के बीज उगाइये . तहजीब के गीत गुनगुनाइए और इसलिए गुनगुनाइए    
क्योंकि आप भारतवासी हैं .
तो फिर मुस्कुराइए की आप भारतवासी हैं .

Wednesday, 25 April 2012

ये है यंगिस्तान

जहाँ एक ओर लोग भारतीय संस्कृति , संस्कार और सभ्यता की बात करते नहीं थकते थे वहीँ आज यहाँ की युवापीढ़ी फैशन के नाम पर भाषा का गलत इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रही है .
फैशन के इस दौर में नौजवान पीढ़ी पढाई - लिखाई और बुज़ुर्गों के सम्मान में भले ही कंजूसी कर ले लेकिन अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाती . जिस तरह आज पिज़्ज़ा और सैंडविच के बिना हमारी पार्टी अधूरी होती है वैसे ही हममे से कुछ लोगों की बिना गालियों के बात पूरी नहीं होती . किसी के मना करने पर बड़ा ही सीधा सा जवाब दिया जाता है -"ये आजकल का ट्रेंड है " .फैशन के नाम पर मॉडर्न कहलाने  वाली आज की न्यू जनरेशन अभद्र भाषा का इस्तेमाल बड़े ही स्टाइल से कर रही है .
इसकी  शुरुवात होती है हमारी संगत से . हमारे दोस्त जिनके साथ हम उठते -बैठते हैं और फ़ोन-इंटरनेट पर गपशप करते हैं दूसरी ओर आज की युवा पीढ़ी पर फिल्मी जगत का खुमार बड़ी तेज़ी से बढ़ रहा है . हीरो-हीरोइने  के कपडे व हेयरस्टाइल  के साथ साथ हम फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली उनकी भाषा को कॉपी करने में बड़ा गर्व महसूस करते हैं . दो दोस्त कुछ इस तरह बात करते पाए जाते हैं -"अरे सा....ले कैसा है तू "या  " कमीने तुने मुझे बताया नहीं " वगैरह -वगैरह . इन अशिष्ट शब्दों को फैशन - ट्रेंड का नाम देने वाले यह भूल गए  हैं कि वह हमारे देश कि संस्कृति को किस मोड़ पर ले जा रहे हैं . लेकिन सोशल वेबसाईट्स के ज़रिये एक सेकेंड्स  में हजारों तक पहुँच बनाने वाले आज के नौजवानों को रोकना मुमकिन नज़र नहीं आता .

Tuesday, 24 April 2012

एक छोटी सी मुस्कान .........बना सकती है आपको महफ़िल की जान .......!!!!

मुस्कराहट को आप गैर अहम् ना समझें ,मुस्कराहट भी एक आर्ट है . यह एक चुम्बकीय असर है जो देखने वालों को अपनी तरफ खींच लेती  है और यह आपकी खूबसूरती में भी इज़ाफा करती  है .
ज़हनी परेशानियाँ और आप का मिजाज़ आप से मुस्कराहट  की दिलकशी छीन लेता है और आप एक खुबसूरत जज़्बे से महरूम हो जाते है . मुस्कुराते चेहरे वाले शख्स से हर कोई मिलना पसंद  करता है चाहे उसका चेहरा इतना खूबसूरत ना हो वहीँ दूसरी ओर माथे पर सिलवटें सजाये शख्स से लोग दूरियां बनाये रखने में ही बेहतरी समझते हैं . यह सच है की हम किसी को कुछ  नहीं दे सकते लेकिन उसके लिए एक मुस्कराहट का तोहफा तो दे ही सकते हैं . याद रखें कि एक उँचा लम्बा कहकहा कभी भी एक नर्म और खूबसूरत मुस्कराहट कि जगह नहीं ले सकता . मुस्कुराना या सलीके से हंसना भी एक फन है .
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हसते हुए ज़ोर- ज़ोर से हाथ पर हाथ मारते हैं , या अपने करीब बैठे हुए किसी को दो हाथ मार देते हैं . यह सब तहज़ीब और वकार के खिलाफ है . आप कि मुस्कराहट का अपना मतलब होना चाहिए. आप अपनी मुस्कराहट के ज़रिये भी अपने जज़्बात का इज़हार कर सकते हैं . मज़ाक, तंज़ , रोमांस यह सारे जज़्बे सिर्फ एक हलकी सी मुस्कराहट से ज़ाहिर किये जा सकते हैं . यकीनी तौर पर आपकी मुस्कराहट को बेमानी नहीं होना चाहिए बल्कि वह अपने मुकम्मल माने ज़ाहिर कर रही .

Monday, 23 April 2012

ग्लोबल वार्मिंग

पिछले कुछ वर्षों से पृथ्वी का तापमान बढ़ता ही जा रहा है , जो आने वाले समय में महाविनाश का संकेत दे रहा है . इसे हम ग्लोबल वार्मिंग के नाम से जानते हैं . सूरज की किरणे जब पृथ्वी पर पड़ती है तो उसमे से कुछ परावर्तित हो कर लौट जाती हैं जबकि बाकी किरणे वायुमंडल में ही रह जाती हैं जो पृथ्वी के तापमान में बढ़ोतरी का कारण बनती  हैं . हमारे वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैस जैसे कार्बोन-डाईओक्सैड, मीथेन , नाइट्रोजन-ओक्सैड इत्यादि मौजूद होती हैं जो पृथ्वी की ऊपरी सतह में व्याप्त ओज़ोन लेयर में बढ़ते छेद का मुख्या कारण है . इन्ही गैसों  की वजह से पृथ्वी पर पड़ने वाली सूरज की किरणे परावर्तित नहीं हो पाती और तापमान निरंतर बढ़ता रहता है .ग्लोबल वार्मिंग ने प्राकृतिक विपदाओं में कोई कसर नहीं छोड़ी है . बाढ़ ,सूखा ,भूकंप ,बवंडर ,जंगलों में आग ,असमय वर्षा ,बेमौसम सर्दी-गर्मी सब इसी के दुष्परिणाम हैं . ग्लेशियर के पिघलने से समुंदरी सतह का बढ़ना चिंता का विषय है . मौसम की अनियमितता के कारण आज  छोटे-छोटे बच्चों में एलर्जी , अस्थमा  मधुमेह, ब्लड प्रेशर , मोटापा जैसे रोगों ने कब्ज़ा कर लिया है .
यदि हम सब अब भी सावधान हो जाये तो इस संकट का सामना कर सकते हैं . इसके लिए हमें कम से कम पेट्रोल , डीज़ल  , ईधन , और बिजली उपकरण जैसे ए.सी. , मिक्सर , इनवर्टर , वाशिंग मशीन , आदि का कम से कम उपयोग करना चाहिए . गहर के आस-पास पौधे लगाएं . प्लास्टिक बैग  का इस्तेमाल बिलकुल न करें , घर  के आस - पास का कूड़ा कचरा नष्ट करें .पानी का सदुपयोग करें . प्रकृति ने हमें सहारा दिया है तो हमें प्रकृति की सुरक्षा करनी चाहिए .

Thursday, 19 April 2012

विद्यार्थियों में बढती अनुशासन की समस्या

 आज की पीढ़ी में एक समस्या अधिकतर पाई जा रही है और वह है अनुशासन . आज की पीढ़ी में अनुशासन पूरी तरह से गायब होता नज़र आ रहा है  . आधुनिक युग में छात्रों के बीच बढती हुई अनुशासनहीनता चिंता का एक विषय है . एक राष्ट्र का निर्माण चट्टानों और पेड़ों से नहीं बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र से होता है . एक अनुशासित नागरिक ही उन्नति
 में सहयोग कर सकता है . 
अगर किसी देश का नागरिक अनुशासनहीन हो तो वह देश विनाश के मार्ग पर चला जायेगा . किसी भी देश का भविष्य 
उसके युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है . लेकिन जो विद्यार्थी अनुशासन में नहीं रह सकता वो अपने जीवन में कभी सफल 
नहीं हो सकता . अगर हर विद्यार्थी खुद को अनुशासन के सचे में ढाले तो वह अपने जीवन के हर संघर्ष में आसानी से 
सफलता प्राप्त कर सकता है . विद्यार्थी जीवन में मनुष्य हीरा होता है इसे अगर अनुशासन के सांचे में ढाला जायेगा तो यह 
और भी चमक जायेगा . वैसे भी अनुशासन की लगाम जीवन को नियंत्रित  करती है . अगर किसी मनुष्य को अपने जीवन 
के किसी भी लक्ष्य को पाना है तो उसे अनुशासन-प्रिय बनना होगा . 

Thursday, 12 April 2012

जिसकी मज़बूत पनाहों में हम सारी दुनिया से लड़ सकते है..........

जिसने उंगली पकड़ कर हमें चलना सिखाया,जिसने ज़िन्दगी के उबड़ -खाबड़ रास्तों पर हमें गिरने से संभाला . एक शख्स जो हमारे घर का  मुखिया होता है . वह जो हमारे दुख में दुखी और ख़ुशी में खुश होता है मगर कभी हम पर ज़ाहिर नही करता . वह शख्स जो हमारे बुरे वक़्त में हमारा सहारा बनता है . जो एक बार मुस्कुरा कर हमें गले लगा लेता है तो लगता है की हमारे सारे दुख दूर हो गए है . वह शख्स जिसकी मज़बूत पनाहों में आते ही लगता है की हम सारी  दुनिया  से लड़ सकते है . जिसकी वजह से हम गर्व से सर ऊँचा कर के  दनदनाते फिरते है . वह शख्स जो हमारी एक फरमाइश पर अपनी दिन भर की सारी थकान भूल जाता है . उस महान और प्यारी शख्सियत की जगह कोई और  नही ले सकता और वह  है मेरे अज़ीज़... "पापा".