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Wednesday, 25 April 2012

ये है यंगिस्तान

जहाँ एक ओर लोग भारतीय संस्कृति , संस्कार और सभ्यता की बात करते नहीं थकते थे वहीँ आज यहाँ की युवापीढ़ी फैशन के नाम पर भाषा का गलत इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रही है .
फैशन के इस दौर में नौजवान पीढ़ी पढाई - लिखाई और बुज़ुर्गों के सम्मान में भले ही कंजूसी कर ले लेकिन अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाती . जिस तरह आज पिज़्ज़ा और सैंडविच के बिना हमारी पार्टी अधूरी होती है वैसे ही हममे से कुछ लोगों की बिना गालियों के बात पूरी नहीं होती . किसी के मना करने पर बड़ा ही सीधा सा जवाब दिया जाता है -"ये आजकल का ट्रेंड है " .फैशन के नाम पर मॉडर्न कहलाने  वाली आज की न्यू जनरेशन अभद्र भाषा का इस्तेमाल बड़े ही स्टाइल से कर रही है .
इसकी  शुरुवात होती है हमारी संगत से . हमारे दोस्त जिनके साथ हम उठते -बैठते हैं और फ़ोन-इंटरनेट पर गपशप करते हैं दूसरी ओर आज की युवा पीढ़ी पर फिल्मी जगत का खुमार बड़ी तेज़ी से बढ़ रहा है . हीरो-हीरोइने  के कपडे व हेयरस्टाइल  के साथ साथ हम फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली उनकी भाषा को कॉपी करने में बड़ा गर्व महसूस करते हैं . दो दोस्त कुछ इस तरह बात करते पाए जाते हैं -"अरे सा....ले कैसा है तू "या  " कमीने तुने मुझे बताया नहीं " वगैरह -वगैरह . इन अशिष्ट शब्दों को फैशन - ट्रेंड का नाम देने वाले यह भूल गए  हैं कि वह हमारे देश कि संस्कृति को किस मोड़ पर ले जा रहे हैं . लेकिन सोशल वेबसाईट्स के ज़रिये एक सेकेंड्स  में हजारों तक पहुँच बनाने वाले आज के नौजवानों को रोकना मुमकिन नज़र नहीं आता .

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