जिसने उंगली पकड़ कर हमें चलना सिखाया,जिसने ज़िन्दगी के उबड़ -खाबड़ रास्तों पर हमें गिरने से संभाला . एक शख्स जो हमारे घर का मुखिया होता है . वह जो हमारे दुख में दुखी और ख़ुशी में खुश होता है मगर कभी हम पर ज़ाहिर नही करता . वह शख्स जो हमारे बुरे वक़्त में हमारा सहारा बनता है . जो एक बार मुस्कुरा कर हमें गले लगा लेता है तो लगता है की हमारे सारे दुख दूर हो गए है . वह शख्स जिसकी मज़बूत पनाहों में आते ही लगता है की हम सारी दुनिया से लड़ सकते है . जिसकी वजह से हम गर्व से सर ऊँचा कर के दनदनाते फिरते है . वह शख्स जो हमारी एक फरमाइश पर अपनी दिन भर की सारी थकान भूल जाता है . उस महान और प्यारी शख्सियत की जगह कोई और नही ले सकता और वह है मेरे अज़ीज़... "पापा".
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