Translate

Thursday, 19 April 2012

विद्यार्थियों में बढती अनुशासन की समस्या

 आज की पीढ़ी में एक समस्या अधिकतर पाई जा रही है और वह है अनुशासन . आज की पीढ़ी में अनुशासन पूरी तरह से गायब होता नज़र आ रहा है  . आधुनिक युग में छात्रों के बीच बढती हुई अनुशासनहीनता चिंता का एक विषय है . एक राष्ट्र का निर्माण चट्टानों और पेड़ों से नहीं बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र से होता है . एक अनुशासित नागरिक ही उन्नति
 में सहयोग कर सकता है . 
अगर किसी देश का नागरिक अनुशासनहीन हो तो वह देश विनाश के मार्ग पर चला जायेगा . किसी भी देश का भविष्य 
उसके युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है . लेकिन जो विद्यार्थी अनुशासन में नहीं रह सकता वो अपने जीवन में कभी सफल 
नहीं हो सकता . अगर हर विद्यार्थी खुद को अनुशासन के सचे में ढाले तो वह अपने जीवन के हर संघर्ष में आसानी से 
सफलता प्राप्त कर सकता है . विद्यार्थी जीवन में मनुष्य हीरा होता है इसे अगर अनुशासन के सांचे में ढाला जायेगा तो यह 
और भी चमक जायेगा . वैसे भी अनुशासन की लगाम जीवन को नियंत्रित  करती है . अगर किसी मनुष्य को अपने जीवन 
के किसी भी लक्ष्य को पाना है तो उसे अनुशासन-प्रिय बनना होगा . 

1 comment: