Translate

Thursday, 22 March 2012

नाकामी ही कामयाबी की कुंजी है




पूजनीय होते है वो लोग जो ज़िन्दगी के कठिन मोड़ पर मुंह के बल गिरते हैं और गिरने के बाद फिर नए जोश-खरोश व  नई उर्जा के  साथ खड़े हो जाते हैं. ऊंचाइयों को छूने  की तमन्ना रखने वाले हर व्यक्ति को अपने जीवन में बहुत  सारी दिकत्तों, परीक्षाओं और कष्टों का सामना करना पड़ता है . लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम अपनी किस्मत को कोसते हुए  अपने बढ़े हुए कदम को पीछे कर लें . हमें तब तक जूझते रहना चाहिए जब तक हमें मंज़िल न मिल जाये . हो सकता है एक-दो प्रयत्न करने पर भी हमे नाकामी का मुंह देखना पड़े . परन्तु निरंतर और अडिग प्रयास ही हमें हमारे सुनहरे भविष्य कि ओर ले जायेगा  . सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं . हमें असफलता को खुद पर हावी न करते हुए एक मकड़ी  कि तरह अपने लक्ष्य को पाने के लिए बार-बार हाथ पैर मारते रहना चाहिए . जितनी बार नीचे गिरेंगे उतनी बार नई आशाओं के साथ दोबारा चढ़ाई करेंगे . हमें अपनी इच्छा शक्ति को मज़बूत करते हुए असफलता का निडरता से सामना करना चाहिए जो कि हमारी कामयाबी कि पहली कुंजी होगी  . 

No comments:

Post a Comment