शोधकर्ताओं का कहना है कि, महान प्रतिभा के धनी एल्बर्ट आइन्स्टाइन अपने दिमाग का एक बहुत छोटा हिस्सा इस्तेमाल करते थे। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप अपने दिमाग का कितना या यूं कहें कि कितना कम हिस्सा इस्तेमाल में लाते हैं? दिमाग का सही प्रयोग न करने पर क्षीण वह हो जाता है जितना आप अपने दिमाग का कम इस्तेमाल करेंगे उतना ही आप कमज़ोरी, दिमागी अव्यवस्थ, कमज़ोर याददाश्त जैसी समस्याओं से खुद को जकड़ा पाएँगे। हालिया खोज ने यह प्रमाणित कर दिया है कि शिक्षा और मस्तिष्क का लगातार इस्तेमाल हमें कई तरह की बीमारियों से संरक्षित करता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डॉ . रॉबर्ट काट्ज़मन ने यह दावा किया है कि अध्यन कार्य और शिक्षा हमारे मस्तिष्क को मंद होने से बचाता है और उस की कोशिकाओं को जीवित रखता है।
अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में हम नई-नई चुनौतियों का सामना करते हैं, जिसके चलते हमारा मस्तिष्क नई सूचनाओं को ग्रहण करता है और विकास प्रक्रिया की ओर अग्रसित होता है। हमारी बुद्धि की संरचना कुछ इस प्रकार है कि यदि उसका प्रयोग सही ढ़ंग से न किया जाये तो उसकी कार्य गति धीमी पड़ जाती है. उदाहरण के लिए, वैज्ञानिकों का कहना है कि आजकल के युवा कंप्यूटर एवं मोबाइल का लगातार इस्तेमाल करने की वजह से पेन-पेपर पर हिसाब व आकलन करने में असमर्थ हो गये हैं। जिसका कारण यह है कि दिमाग
का वह हिस्सा जो इस काम को अन्जाम देता है वह कमज़ोर हो गया है क्योंकि उसका उपयोग बंद कर दिया गया है।
टीवी स्क्रीन के सामने घंटो बैठे रहने से जहाँ आप का मस्तिष्क बिना किसी काम में आए केवल चलती फिरती इमेज अपने अन्दर उतारता रहता है जो हमारे दिमाग की कई महत्वपूर्ण कोशिकाओं को मार डालता है। कभी-कभी ये हमारे दिमाग पर नकारात्मक असर डालता है जो हमें असभ्यता और हिंसा की ओर अग्रसर करता है।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारा शरीर और मस्तिष्क धीरे-धीरे कमज़ोर होने लगता है। जिस तरह हमारी मांसपेशियाँ उम्र के साथ साथ ढ़ीली पड़ जाती हैं उसी तरह हमारे मस्तिष्क की क्रियाशीलता भी धीरे-धीरे मद्धिम पड़ जाती है।
अधिकतर लोगअपनी शारीरिक व मानसिक क्षमताओं को नष्ट कर देते हैं। डाक्टरों व योगियों का कहना है कि नियमित रूप से व्यायाम न करने पर हमारी मांसपेशियों में जंग लग जाता है। या यूँ कहें कि उनमें लचीलापन खत्म हो जाता है और वे कठोर एवं सख्त हो जाती हैं, जिसकी वजह से जिसकी वजह से लोगों को लोगों को चलने फिरने में तकलीफ होती है। घुटनों में सूजन, कमर में दर्द आदि परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह से अगर दिमाग का इस्तेमाल न किया जाये तो उसमे भी जंग लग जाता है यानि कि वह धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। यदि आप चाहते हैं कि मानसिक रूप से हमेशा चुस्त-दुरुस्त रहें तो ज्ञानवर्धक किताबों का अध्यन करें, ऐसे टीवी चैनल्स देखें जो आपके ज्ञान को बढ़ावा देते हैं और साथ ही साथ आप चेस जैसे खेल भी खेल कर अपनी बुद्धि का विकास कर सकते हैं।
अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में हम नई-नई चुनौतियों का सामना करते हैं, जिसके चलते हमारा मस्तिष्क नई सूचनाओं को ग्रहण करता है और विकास प्रक्रिया की ओर अग्रसित होता है। हमारी बुद्धि की संरचना कुछ इस प्रकार है कि यदि उसका प्रयोग सही ढ़ंग से न किया जाये तो उसकी कार्य गति धीमी पड़ जाती है. उदाहरण के लिए, वैज्ञानिकों का कहना है कि आजकल के युवा कंप्यूटर एवं मोबाइल का लगातार इस्तेमाल करने की वजह से पेन-पेपर पर हिसाब व आकलन करने में असमर्थ हो गये हैं। जिसका कारण यह है कि दिमाग
का वह हिस्सा जो इस काम को अन्जाम देता है वह कमज़ोर हो गया है क्योंकि उसका उपयोग बंद कर दिया गया है।
टीवी स्क्रीन के सामने घंटो बैठे रहने से जहाँ आप का मस्तिष्क बिना किसी काम में आए केवल चलती फिरती इमेज अपने अन्दर उतारता रहता है जो हमारे दिमाग की कई महत्वपूर्ण कोशिकाओं को मार डालता है। कभी-कभी ये हमारे दिमाग पर नकारात्मक असर डालता है जो हमें असभ्यता और हिंसा की ओर अग्रसर करता है।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारा शरीर और मस्तिष्क धीरे-धीरे कमज़ोर होने लगता है। जिस तरह हमारी मांसपेशियाँ उम्र के साथ साथ ढ़ीली पड़ जाती हैं उसी तरह हमारे मस्तिष्क की क्रियाशीलता भी धीरे-धीरे मद्धिम पड़ जाती है।
अधिकतर लोगअपनी शारीरिक व मानसिक क्षमताओं को नष्ट कर देते हैं। डाक्टरों व योगियों का कहना है कि नियमित रूप से व्यायाम न करने पर हमारी मांसपेशियों में जंग लग जाता है। या यूँ कहें कि उनमें लचीलापन खत्म हो जाता है और वे कठोर एवं सख्त हो जाती हैं, जिसकी वजह से जिसकी वजह से लोगों को लोगों को चलने फिरने में तकलीफ होती है। घुटनों में सूजन, कमर में दर्द आदि परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह से अगर दिमाग का इस्तेमाल न किया जाये तो उसमे भी जंग लग जाता है यानि कि वह धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। यदि आप चाहते हैं कि मानसिक रूप से हमेशा चुस्त-दुरुस्त रहें तो ज्ञानवर्धक किताबों का अध्यन करें, ऐसे टीवी चैनल्स देखें जो आपके ज्ञान को बढ़ावा देते हैं और साथ ही साथ आप चेस जैसे खेल भी खेल कर अपनी बुद्धि का विकास कर सकते हैं।
No comments:
Post a Comment